मध्य प्रदेश सरकार में दिव्यांगजनों के आरक्षित पदों पर भर्ती का एक दोर शुरू हुए महीनो बीत गए है। किंतु दिव्यांगजनों को अभी तक किसी विभाग से नियुक्ति पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं। जैसे तैसे दिव्यांगजन अपनी समस्याओं से लड़ते हुए इन विभागों के द्वारा निकाले गए विज्ञापन के लिए आवेदन करते हैं फिर सभी भागों का बार-बार चक्कर लगाकर पूछते हैं कि हमारा इंटरव्यू कब होगा हमें नियुक्ति कब प्राप्त होगी लेकिन किसी भी विभाग के पास इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं है क्योंकि दिव्यांगजनों के चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती नए पेच में फंस चुकी है। ग्रेडेशन एवं परसेंटेज की तुलना।
मध्य प्रदेश सरकार में 2011 तक ग्रेडेशन सिस्टम लागू नहीं था किंतु 2011 के बाद से वर्तमान में भी कक्षा 8 में ग्रेडेशन सिस्टम लागू है इस कारण जो भी अभ्यर्थी 2011 के पूर्व आठवीं की परीक्षा पास किए हैं उनका मूल्यांकन आठवीं के प्रतिशत के आधार पर किया जा रहा है । किंतु 2011 के बाद के अभ्यर्थियों जिनके मार्कशीट में ए ग्रेड ए प्लस ग्रेड बी ग्रेड दिया हुआ है उनका प्रतिशत कैसे निकाला जाए और किस आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाए। सभी विभाग इस असमंजस में फंसे हैं इस संबंध में सामाजिक न्याय विभाग द्वारा प्रमुख विभागों को बुलाकर बैठक भी की गई किंतु बैठक में भी कोई हल नहीं निकला। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से कई बार लताड़ सुनने के बाद सामाजिक न्याय विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशन में दिव्यांगजनो के पदों पर भर्ती की जा रही है।
दिव्यांग जनों के लिए आरक्षित पदों पर सभी भागों द्वारा अलग अलग से भर्ती निकली जा रही है।
पहले तो दिव्यांगजन 54 विभागों अलग-अलग साथ आवेदन प्रस्तुत करेंगे उसके बाद प्रत्येक विभाग के लिए अलग-अलग इंटरव्यू की तारीखों में भोपाल में या विभाग के मुख्यालय पर उपस्थित होंगे अगर इस में निगम मंडलों को मिला लिया जाए तो लगभग 200
स्थान पर दिव्यांगजन बस के सफ़र ट्रेन से जैसे तैसे पहुंचते हैं और उनकी अगर भारती नहीं होती है और उन्हें केवल आश्वासन मिलता है की कार्रवाई चल रही है तो यहां उनके प्रति किसी अन्याय से कम नहीं है। जिस प्रकार सरकार अन्य परीक्षा लेती है उसी प्रकार दिव्यांगजनों के पदों पर विज्ञापन निकल कर मेरिट तैयार कर सभी विभागों को भेज सकती है। इससे यहां लाभ होगा कि सभी दिव्यांगजन समस्त विभागों के पदों के लिए केवल एक बार आवेदन करेगा और उसे केवल एक ही विभाग में जाकर इंटरव्यू देना होगा बार-बार अलग-अलग विभाग में जाकर किराया खर्चा नहीं करना पड़ेगा साथ ही विभागों को भी पृथक पृथक विज्ञापन निकालकर अपना समय बर्बाद होने से बचेगा।
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