हिंदी साहित्य का संसार अत्यंत विशाल है, लेकिन कुछ ऐसी कृतियां हैं जिन्होंने समय की सीमाओं को लांघकर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इन उपन्यासों ने न केवल समाज को आइना दिखाया, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की गहरी पड़ताल भी की।
यहाँ हिंदी साहित्य के 10 कालजयी उपन्यास दिए गए हैं:
1. गोदान — प्रेमचंद (1936)
इसे हिंदी का सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है। यह भारतीय ग्रामीण समाज, किसान की त्रासदी और औपनिवेशिक शोषण का सजीव चित्रण है। होरी और धनिया की कहानी हर काल में प्रासंगिक लगती है।
2. मैला आँचल — फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ (1954)
यह हिंदी का पहला महान ‘आंचलिक उपन्यास’ है। पूर्णिया जिले के एक गाँव की मिट्टी की खुशबू, राजनीति, लोकगीत और अंधविश्वासों को रेणु ने जिस खूबसूरती से पिरोया है, वह बेजोड़ है।
3. शेखर: एक जीवनी — अज्ञेय (1941)
यह एक मनोवैज्ञानिक उपन्यास है। इसमें नायक ‘शेखर’ के माध्यम से स्वतंत्रता, विद्रोह और मानवीय संबंधों की जटिलताओं को एक नई दार्शनिक दृष्टि से देखा गया है।
4. बाणभट्ट की आत्मकथा — हजारी प्रसाद द्विवेदी (1946)
हर्षवर्धन काल की पृष्ठभूमि पर आधारित यह उपन्यास अपनी पांडित्यपूर्ण भाषा और उदात्त प्रेम के लिए जाना जाता है। यह इतिहास और कल्पना का अद्भुत मिश्रण है।
5. झूठा सच — यशपाल (1958)
भारत-विभाजन की त्रासदी पर लिखा गया यह सबसे विस्तृत और प्रामाणिक दस्तावेज़ है। यह देश के बंटवारे के दर्द, विस्थापन और मानवीय मूल्यों के पतन की गहरी कहानी कहता है।
6. राग दरबारी — श्रीलाल शुक्ल (1968)
यह आधुनिक भारत की व्यवस्था, राजनीति और भ्रष्टाचार पर किया गया सबसे पैना और मारक व्यंग्य है। ‘शिवपालगंज’ गाँव के जरिए लेखक ने पूरे देश की विसंगतियों को दिखाया है।
7. तमस — भीष्म साहनी (1973)
विभाजन से ठीक पहले के सांप्रदायिक दंगों पर आधारित यह उपन्यास रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यह दिखाता है कि कैसे आम आदमी राजनीति और नफरत का शिकार बनता है।
8. आपका बंटी — मन्नू भंडारी (1971)
यह उपन्यास एक बच्चे के मनोविज्ञान पर आधारित है, जिसके माता-पिता का तलाक हो रहा है। यह आधुनिक पारिवारिक विघटन और बच्चों पर उसके प्रभाव की मर्मस्पर्शी कथा है।
9. सारा आकाश — राजेंद्र यादव (1951)
मध्यवर्गीय परिवार की घुटन, बेरोजगारी और वैवाहिक जीवन की विसंगतियों को इस उपन्यास में बहुत बारीकी से उकेरा गया है।
10. चित्रलेखा — भगवती चरण वर्मा (1934)
‘पाप और पुण्य’ की दार्शनिक बहस पर आधारित यह उपन्यास आज भी पाठकों को सोचने पर मजबूर कर देता है। इसकी कहानी मौर्य काल की पृष्ठभूमि में रची गई है।
> यदि आप हिंदी साहित्य की शुरुआत करना चाहते हैं, तो ‘गोदान’ या ‘राग दरबारी’ से करना सबसे अच्छा अनुभव हो सकता है।
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